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पीले पन्ने पर लाल स्याही से लिखा हनुमान चालीसा

विस्तार

प्रभु राम के महान भक्त हनुमान के गुणों एवं कार्यों का वर्णन हनुमान चालीसा कहलाता है ! इसमें मुख्य रूप से चालीस चौपाई होती है ! यह एक काव्यात्मक कृति है ! इसमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की अत्यन्त लघु रचना है ! साथ ही साथ श्री राम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में दर्शाया गया है ! हनुमान चालीसा लगभग हर हिन्दू भक्त के कण्ठस्थ होता है ! क्योकि हनुमान जी वीरता, भक्ति और साहस की प्रतिमूर्ति है !

अगर पूरे मनोयोग से प्रतिदिन 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया जाये तो हनुमान चालीसा का एक-एक शब्द प्रभावशाली साबित होता है ! हनुमान जी को बजरंगबली, पवनपुत्र, मारुतीनन्दन, केसरी नन्दन , महावीर आदि नामों से भी जाना जाता है !

हनुमान चालीसा पाठ के लाभ

हनुमान जी को प्रतिदिन याद करने और हनुमान चालीसा का जाप करने से मनुष्य के सभी भय दूर होते हैं ! हनुमान चालीसा पाठ करने से सभी क्लेश मिटते हैं ! हनुमान जी की भक्ति पर विचार करने से मन में श्रेष्ठ ज्ञान विकसित होता है ! तथा भक्तिभाव जाग्रत होता है ! हनुमान चालीसा पाठ करने से भक्तों के ऊपर आने वाली हर विपदा दूर होती है ! हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से हर प्रकार के दुखों के निवारण, भय से मुक्ति मिलती है !
हनुमान चालीसा में चमत्कारी शक्तियों का वर्णन होने के कारण हनुमंत की कृपा अवश्य मिलती है ! अगर आप लम्बे समय से बीमार है तो नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू करे ! संकट के समय रक्षा के लिए हनुमान चालीसा का पाठ जरुर करे ! बुरी संगत से बचने हेतु नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए ! पढाई में मन लगाने में हनुमान चालीसा पाठ बहुत महत्वपूर्ण है ! यदि आपका महत्वपूर्ण कार्य जो लंबे समय से अटका हुआ है तो आपको तुरंत हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर देना चाहिए ! अगर आपका मन विचलित हो रहा है हनुमान चालीसा पाठ मन को शांत करने में अहम भूमिका निभाता है !

हनुमान चालीसा पाठ के दौरान सावधानियां

हमेशा स्नान कर साफ कपड़े पहन कर ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए ! कभी भी खाली जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करे ! आसन पर बैठकर ही पाठ करना शुभ होता है ! पाठ शुरू करने से पहले हनुमान जी की मूर्ति पर लाल सिंदूर चढ़ाना चाहिए !

हमेशा पीले पन्ने पर लाल स्याही से लिखे हनुमान चालीसा का ही पाठ करे ! पाठ शुरू करने से पहले अपने इष्ट देव की पूजा भी करे ! हनुमान चालीसा पाठ के दौरान ब्राह्मण को अपनी इच्छा अनुसार दान जरुर करे ! किसी भी प्रचलित बालाजी मंदिर में भी दान करना चाहिए ! हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान मन पूरी तरह से शांत और बिना किसी बुरे विचार के होना चाहिए ! बंदरों के लिए खाना ज़रूर खिलाएं !

हनुमान चालीसा का इतिहास

एक बार जब अकबर को इच्छा हुई की उन्हें भगवान श्री राम से मिलना है ! इसके लिए अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास को अपने दरबार में बुलावा भेजा ! तुलसीदास जी आये और अकबर ने अपनी इच्छा जाहिर की और बोले मुझे आज किसी भी कीमत पर भगवान राम से मिलना है ! तब तुलसीदास जी ने कहा कि भगवान श्री राम अपने भक्तों को ही दर्शन देते हैं ! यह सुनते ही अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को जेल में डाल दिया !

उसी समय जेल में रहते हुए गोस्वामी जी ने अवधी भाषा में हनुमान चालीसा लिखी ! कहा जाता है कि हनुमान चालीसा लिखने का काम पूरा होते ही बंदरों ने फतेहपुर सीकरी को घेर लिया और उस पर हमला कर दिया ! अकबर की पूरी सेना मिलकर बंदरो को नहीं भगा पाई ! तब अकबर ने एक मंत्री की सलाह पर तुलसीदास जी को जेल से मुक्त कर दिया !

कहा जाता है कि जैसे ही तुलसीदास जी को कारागार से मुक्त किया गया, वानर पूरे क्षेत्र को छोड़कर चले गए !

श्री हनुमान चालीसा

दोहा :-

गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥

चौपाई :-

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर

राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥१॥

महाबीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी

कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुंडल कुँचित केसा ॥२॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेऊ साजे

शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवंदन ॥३॥

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मनबसिया ॥४॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा

भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सवाँरे ॥५॥

लाय सजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई ॥६॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै अस कहि श्रीपति कंठ लगावै

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ॥७॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कवि कोविद कहि सके कहाँ ते

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥८॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना लंकेश्वर भये सब जग जाना

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥९॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लाँघि गए अचरज नाही

दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥१०॥

राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे

सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना ॥११॥

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक ते काँपै

भूत पिशाच निकट नहि आवै महाबीर जब नाम सुनावै ॥१२॥

नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा

संकट ते हनुमान छुडावै मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥१३॥

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा

और मनोरथ जो कोई लावै सोइ अमित जीवन फल पावै ॥१४॥

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा

साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे ॥१५॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता

राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ॥१६॥

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै

अंतकाल रघुवरपुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥१७॥

और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई

संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥१८॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ कृपा करहु गुरु देव की नाई

जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बंदि महा सुख होई ॥१९॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा

तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥२०॥

दोहा :-

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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