देश में कोरोना महामारी को देखते हुए बालाजी धाम मंदिर का डिजिटलीकरण करने में मंदिर समिति का सहयोग करें। बहुत कम घर से निकलें और वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन और प्रसाद व दान का लाभ उठाएं !
How to Reach Salasar Balaji Dham

How to Reach Salasar Balaji Dham

How to Reach Salasar Balaji Dham

सालासर बालाजी तक कैसे पहुँचें

राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी भगवान हनुमान के भक्तों के लिए एक धार्मिक स्थल है ! सालासर बालाजी धाम में देश विदेश से हर साल लाखो लोग दर्शन के लिए आते है ! हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा पर यहाँ बहुत बड़े पैमाने पर मेले का आयोजन किया जाता है ! सालासर बालाजी धाम के अलावा बालाजी मूर्ती के मुह पर सिंदूर लगा हुआ है लेकिन सालासर बालाजी के मुह पर दाढ़ी और मूंछ है !

इतिहास बताता है की इस मूर्ती का निर्माण मुस्लिम कारीगरों ने किया था इसलिए श्री बालाजी के मुह पर दाढ़ी और मूंछ है ! यह मंदिर सालासर कस्बे के बीचो बीच स्थित है ! बहार के यात्रिओ को रुकने के लिए यहाँ काफी धर्मशाला उपलब्ध है !

सालासर कहा स्थित है ! Where is Salasar Balaji Dham located?

जयपुर और बीकानेर राजमार्ग पर स्थिर चुरू जिले में सालासर एक क़स्बा है ! सालासर बालाजी धाम सीकर से 57 किमी सुजानगढ़ से 24 किमी और लक्ष्मणगढ़ से 30 किमी की दूरी पर स्थित है ! सालासर कस्बे की अधिकारिक रूप से सुजानगढ़ पंचायत समिति देख रेख करती है ! अगर अप सडक यातायात से सालासर बालाजी धाम पहुचना चाहते है तो दिल्ली जयपुर उत्तर प्रदेश से सफलता पूर्वक राजस्थान सडक परिवहन की बस सेवा उपलब्ध होती है !

अगर आप वायु परिवहन से सालासर बालाजी धाम पहुचना चाहते है ! तो जयपुर सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है ! यहाँ से मात्र 3.5 घंटे में बालाजी धाम पहुच जाते है !

अगर आप रेलवे से श्री बालाजी धाम सालासर की यात्रा करना चाहते है तो Sujangarh, Sikar, Didwana, Jaipur and Ratangarh बालाजी के नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं !

यह मंदिर बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी से मात्र 140 KM की दूरी पर स्थित है !

Online Donation Platform Balaji Dham

हमे यह जानकर बहुत ख़ुशी हुई की आप श्री बालाजी महाराज के बहुत बड़े भक्त हो ! श्री बालाजी के दरबार में अपनी इच्छा शक्ति अनुसार दान करे ! भगवान आपकी हर मनोकामन पूरी करेंगे

सालासर बालाजी धाम स्थापना Salasar Balaji Dham Establishment

नागौर जिले में असोटा गाँव का एक गिन्थाला-जाट किसान अपने खेत को जोत रहा था ! यह दिन था श्रावण शुक्ल पक्ष नवमी, संवत 1811 – शनिवार ! अचानक, एक चट्टानी चीज ने उसके हल को मारा और एक भिनभिनाहट की ध्वनि उत्पन्न हुई। उन्होंने उस स्थान की मिट्टी खोदी और दो मूर्तियों को कीचड़ में लथपथ पाया। उसकी पत्नी उसके लिए खाना लेकर वहाँ पहुँची। किसान ने अपनी पत्नी को मूर्ति दिखाई। उन्होंने अपनी साड़ी (ड्रेस) से मूर्ति को साफ किया।

यह मूर्ति बालाजी भगवान हनुमान की थी। उन्होंने भक्ति के साथ अपने सिर झुकाए और भगवान बालाजी की पूजा की। भगवान बालाजी के प्रकट होने की यह खबर तुरंत आसोटा गांव में फैल गई। असोटा के ठाकुर ने भी यह खबर सुनी। बालाजी उनके सपने में आए और उन्होंने इस मूर्ति को चूरू जिले के सालासर भेजने का आदेश दिया। उसी रात भगवान हनुमान के भक्त सालासर के मोहन दासजी महाराज ने भी अपने सपने में भगवान हनुमान यानी बालाजी को देखा। भगवान बालाजी ने उन्हें असोटा की मूर्ति के बारे में बताया।

उन्होंने तुरंत असोटा के ठाकुर को एक संदेश भेजा। जब ठाकुर को पता चला कि मोहन दासजी को आसोटा आने के बारे में कुछ जानकारी है, तो वह हैरान रह गए। निश्चित रूप से, यह सब केवल सर्वशक्तिमान भगवान बालाजी की कृपा से हो रहा था। मूर्ति को सालासर भेजा गया था और इस स्थान को आज सालासर धाम के नाम से जाना जाता है। इस स्थान से 25 किमी दूर पाबोलम (जसवंतगढ़) में दूसरी मूर्ति स्थापित की गई थी। समारोह पाबलव में सुबह और शाम को सालासर में उसी दिन आयोजित किया गया था !

सालासर बालाजी धाम कैसे पहुचे How to Reach Salasar Balaji Dham

नयी दिल्ली -> गुरुग्राम (गुड़गाँव) -> रेवाड़ी -> नारनौल -> चिडावा -> झुंझुनू -> मुकुंदगढ़ -> लक्ष्मणगढ़ -> सालासर बालाजी (318 किलोमीटर)

(आपको रेवाड़ी रोड़ से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 को छोड़कर रेवाड़ी से झुंझुनू जाने वाला रास्ता लेना होगा) (सबसे छोटा रास्ता)

2.) नयी दिल्ली -> गुरुग्राम -> बहरोड़ -> नारनौल -> चिडावा -> झुंझुनू -> मुकुंदगढ़ -> लक्ष्मणगढ़ -> सालासरबालाजी (335 किलोमीटर)

(ऊपर बताये गये रास्ते से यह मार्ग बेहतर है, आपको बहरोड़ से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा, लेकिन बहरोड़-चिडावा-झुंझुनू वाला रास्ता बहुत खराब है)

3.) नयी दिल्ली -> गुरुग्राम -> बहरोड़ -> कोटपुतली -> नीमकाथाना -> उदयपुरवाटी -> सीकर -> सालासर बालाजी (335 किलोमीटर) (आपको कोटपुतली से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा)

4.) नयी दिल्ली -> गुरुग्राम -> बहरोड़ -> कोटपुतली-> शाहपुरा-> अजीतगढ़ -> सामोद -> चोमूँ -> सीकर -> सालासर बालाजी (392 किलोमीटर) (आपको शाहपुरा से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा) इसे सामोद मार्ग के रूप में भी जाना जाता है।

5.) नयी दिल्ली -> गुरुग्राम -> बहरोड़ -> कोटपुतली-> शाहपुरा -> चंदवाजी -> चोमूँ -> सीकर -> सालासर बालाजी (399 किलोमीटर) (आपको शाहपुरा से राष्ट्रीय राजमार्ग-8 छोड़ना होगा) इसे चंदवाजी मार्ग भी कहा जाता है। हालाँकि यह मार्ग लम्बा है, इसकी लम्बाई लगभग 225 किलोमीटर है, परन्तु राष्ट्रीय राजमार्ग-8 एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाकर आराम से जा सकते हैं।

6.) नयी दिल्ली -> बहादुरगढ़ -> झज्झर -> चरखीदादरी -> लोहारू -> चिडावा -> झुंझुनू -> मुकुंदगढ़ -> लक्ष्मणगढ़ -> सालासर बालाजी (302 किलोमीटर) यह नया रास्ता है जिसे कम भक्त जानते हैं।

7.) नयी दिल्ली -> रोहतक -> हिसार -> राजगढ़ -> चुरू -> फतेहपुर -> सालासर बालाजी (382 किलोमीटर)

सालासर में बालाजी के अलावा और दर्शनीय स्थल

मोहनदास की धूनी :-

यह वो पवित्र जगह है जहा भगवान बालाजी के भक्त मोहनदास ने अग्नि जलाई थी ! यह अग्नि आज भी जली हुई है ! यहाँ से श्री बालाजी भक्त बानी ( धूनी ) ले जाते है !

अंजनी माता मंदिर :-

अंजनी माता का मंदिर सालासर धाम से लक्ष्मणगढ़ की ओर दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अंजनी माता श्री बालाजी की माता थीं !

शयनन माता मंदिर :-

सालासर बालाजी धाम से लगभग 15 किमी दूर रेगिस्तान में एक अनोखी पहाड़ी पर स्थित शयनन माता मंदिर है जो की 1100 साल पुराना मंदिर भी माना जाता है !

गुदावादी श्याम मंदिर :-

गुदावादी श्याम मंदिर भी सालासर धाम से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मोहनदास जी के समय से, बालाजी मंदिर के परिसर में दो बैलगाड़ियाँ यहाँ रखी गई हैं !

उम्मीद करता हु आपको How to Reach Salasar Balaji Dham Successfully समझ आया ! बालाजी दर्शन के लिए धन्यवाद

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आज सावन मास का प्रथम मंगलवार है ! सावन में शिव को प्रसन्न करने के लिए साथ में करें हनुमान पूजा

सावन के महीने में हनुमान जी की पूजा करने से हर कष्ट दूर हो जाते है.हनुमान जी एकादश रुद्र अवतार हैं, वे भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार है अगर बजरंग बली को प्रसन्न करना है और साथ ही शिव जी का आशीर्वाद पाना है तो श्रावण महीने में हनुमान जी का पूजन जरूर करना चाहिए !